पुतिन की भारत यात्रा 2025: क्या Su-57 डील भारत की रक्षा रणनीति बदल देगी?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 4–5 दिसंबर 2025 को भारत यात्रा सिर्फ एक राजनयिक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की एशियाई शक्ति-संतुलन का संकेत मानी जा रही है। यह 23वाँ भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका भारत पर रूस से रक्षा और तेल व्यापार कम करने का दबाव बना रहा है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति पर कायम है।
इस संभावित यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र है—Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट डील, जो भारत की वायु शक्ति का नक्शा बदल सकती है और एशिया में ताकत का नया समीकरण बना सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?
1. रूस–भारत साझेदारी का पुनर्जीवन
पिछले तीन वर्षों में यूक्रेन युद्ध के चलते भारत–रूस शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो पाया। ऐसे में पुतिन की यह यात्रा दिखाती है कि दोनों देश पुरानी सामरिक साझेदारी को नये स्तर पर ले जाने को तैयार हैं।
2. अमेरिका की बढ़ती चिंता
अमेरिका लगातार चाहता है कि भारत रूस की सैन्य निर्भरता कम करे, लेकिन
- भारत रूस से सस्ते तेल की बड़ी मात्रा लेता रहा है,
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और 60–70% सैन्य उपकरण अब भी रूसी मूल के हैं।
Su-57 की संभावित खरीद अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक झटका होगी।
Su-57 सौदे के संभावित फायदे: भारत की रक्षा रणनीति कैसे बदलेगी?
नीचे वे मुख्य बदलाव हैं जो इस डील के बाद देखने को मिल सकते हैं:
1. वायुसेना की स्टेल्थ क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी
Su-57 रूस का 5th-Generation स्टेल्थ फाइटर है।
यदि यह भारत आता है, तो भारतीय वायुसेना चीन के J-20 और पाकिस्तान के संभावित J-31 जैसे लड़ाकू विमानों के मुकाबले तकनीकी बढ़त हासिल कर सकती है।
2. तकनीक के हस्तांतरण में बड़ा लाभ
भारत के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि रूस
✔ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार
✔ जॉइंट प्रोडक्शन पर भी चर्चा संभव
यह वही चीज है जो अमेरिका F-35 के साथ नहीं देता।
3. आत्मनिर्भर भारत (Defence Indigenisation) को बढ़ावा
Su-57 कार्यक्रम में भारत की साझेदारी होने पर—
- भविष्य के AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट को मदद मिलेगी
- स्टेल्थ कोटिंग, राडार-अवशोषक सामग्री, इंजन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र मजबूत होंगे
- देश में ही कोर एयरोस्पेस क्षमता तैयार होगी
4. भू-राजनीतिक संकेत: बहुध्रुवीय विश्व की ओर कदम
भारत यदि Su-57 के लिए आगे बढ़ता है, तो यह संदेश जाएगा कि—
भारत किसी भी एक शक्ति-गुट के साथ बंधा नहीं है।
यह “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” का सबसे मजबूत उदाहरण होगा।
5. चीन–पाकिस्तान अक्ष पर असर
भारत की Su-57 क्षमता चीन के लिए एक एयर सुपीरियरिटी चुनौती होगी, खासकर लद्दाख–अरुणाचल सेक्टर में।
पाकिस्तान, जो चीन पर पूरी तरह निर्भर है, भारत की इस नई ताकत का मुकाबला नहीं कर पाएगा।
क्या अमेरिका प्रतिक्रिया देगा?
जी हाँ—और काफ़ी कड़ा।
संभावनाएँ:
- CAATSA प्रकार के प्रतिबंधों पर फिर चर्चा
- उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग धीमा हो सकता है
- व्यापार पर टैरिफ बढ़ोतरी
लेकिन भारत के लिए यह संतुलन का खेल नया नहीं है। रूस और अमेरिका दोनों से रिश्ते उसकी कूटनीति की बहु-आयामी रणनीति का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष: 2025 भारत–रूस शिखर सम्मेलन क्यों ऐतिहासिक हो सकता है?
यदि Su-57 डील पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह सिर्फ एक रक्षा खरीद नहीं होगी—
बल्कि भारत की सामरिक सोच, तकनीकी क्षमता और वैश्विक स्थिति में बड़ा परिवर्तन लाने वाला कदम होगा।
यह यात्रा दिखाएगी कि भारत
- अपने हितों से समझौता नहीं करता,
- और वैश्विक मंच पर एक स्वायत्त महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
