भारत-बांग्लादेश तनाव: पाकिस्तान और चीन की एंट्री से क्यों बढ़ रही है भारत की चिंता?
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दक्षिण एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव तेज़ हो रहा है। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आई कड़वाहट अब सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसमें पाकिस्तान और चीन की सक्रिय भूमिका इसे रणनीतिक संकट की ओर ले जाती दिख रही है। हालिया घटनाक्रम यह सवाल खड़ा करता है कि क्या भारत एक संभावित तीन-फ्रंट चुनौती की ओर बढ़ रहा है?
भारत-बांग्लादेश संबंध: कहां से बिगड़ा समीकरण?
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलनों से शुरू हुई राजनीतिक अस्थिरता ने धीरे-धीरे भारत-विरोधी रूप ले लिया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद यह भावना और भड़क गई। इसके बावजूद भारत की ओर से सख्त प्रतिक्रिया न आने पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत की विदेश नीति बांग्लादेश में अपनी पकड़ खो चुकी है।
पाकिस्तान की रणनीति: 1971 का बदला?
पाकिस्तान इस संकट को 1971 की हार का बदला लेने के अवसर के रूप में देख रहा है। उस युद्ध में भारत के समर्थन से पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र बांग्लादेश बना था। अब पाकिस्तान खुले तौर पर भारत को धमकियां दे रहा है और बांग्लादेश में अपने प्रभाव को दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, खासकर कट्टरपंथी इस्लामी गुटों के जरिए।
इतिहास की विडंबना: पुराने जख्मों की अनदेखी
विडियो के अनुसार, बांग्लादेश के कुछ ऐसे तत्व जो 1971 में पाकिस्तान समर्थक थे, आज फिर सक्रिय हो गए हैं। यह तब है जब उसी दौर में पाकिस्तानी सेना पर बांग्लादेश में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगे थे। यह बदलाव बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को और जटिल बना रहा है।
भारत के लिए रणनीतिक चुनौती: तीन-फ्रंट खतरा?
भारत पहले से ही पाकिस्तान और चीन की चुनौती झेल रहा है। अब यदि बांग्लादेश भी शत्रुतापूर्ण रुख अपनाता है, तो भारत के सामने तीन-फ्रंट दबाव की स्थिति बन सकती है।
हालांकि सैन्य शक्ति में भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों से आगे है, लेकिन संसाधनों और रणनीति का संतुलन सबसे बड़ी चुनौती है।
चीन की भूमिका: युद्ध नहीं, मुनाफा?
चीन सीधे युद्ध में कूदने के बजाय हथियारों की बिक्री और सैन्य ढांचे के ज़रिये फायदा उठाना चाहता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन बांग्लादेश में भारत के संवेदनशील “चिकन नेक कॉरिडोर” के पास एक एयरबेस विकसित कर रहा है, जो भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ताजा संकेत और भारत के विकल्प
हाल ही में बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा भारत से रिश्ते सुधारने के संकेत मिले हैं, लेकिन साथ ही युवा नेता उस्मान हादी की मौत को लेकर नए राजनीतिक आरोप भी सामने आए हैं।
भारत के सामने अब यह बड़ा सवाल है कि वह हार्ड पावर (सख्त सैन्य-रणनीतिक कदम) अपनाए या सॉफ्ट पावर (कूटनीति और संवाद) के जरिए स्थिति संभाले।
निष्कर्ष
भारत-बांग्लादेश संबंध इस समय निर्णायक मोड़ पर हैं। पाकिस्तान और चीन की सक्रियता ने इस संकट को और जटिल बना दिया है। आने वाले समय में भारत की विदेश और सुरक्षा नीति यह तय करेगी कि यह तनाव सीमित रहता है या एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप लेता है।