डॉलर के सामने गिरता रुपया: जानिए इसके पीछे की दिलचस्प हकीकतें
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| India’s Rupee Turns Asia’s Weakest Currency |
भारतीय रुपया एक बार फिर सुर्खियों में है—और वजह है उसकी लगातार होती गिरावट। लेकिन इस उतार-चढ़ाव के पीछे कई ऐसे तथ्य छिपे हैं जिन्हें जानना बेहद जरूरी है। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
💡1. रुपये की दिलचस्प शुरुआत
जब भारत आज़ाद हुआ था, तब 1 डॉलर की कीमत सिर्फ ₹3.30 थी। आज वही डॉलर ₹89–90 के बीच घूम रहा है। यह सफ़र सिर्फ संख्या का बदलाव नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, वैश्विक राजनीति और बाज़ार की मांग-आपूर्ति की कहानी है।
🌍 2. दुनिया पर डॉलर का दबदबा
भले ही IMF पाँच बड़ी मुद्राओं को वैश्विक स्तर पर पहचान देता हो, लेकिन दुनिया के 85% लेनदेन आज भी डॉलर में ही होते हैं। यही वजह है कि डॉलर किसी भी आर्थिक हलचल का केंद्र बना रहता है और बाकी मुद्राओं पर दबाव पड़ता है।
🪙 3. RBI ने सोना खरीदा, पर कीमत चुकाई डॉलर में
अपने व (Forex Reserves) को मजबूत करने के लिए RBI ने हाल ही में 220 टन सोना खरीद लिया। लेकिन विडंबना यह है कि यह खरीद भी डॉलर में ही होती है, जिससे देश के पास उपलब्ध डॉलर और कम हो जाते हैं। यानी रिज़र्व बढ़ा, लेकिन डॉलर का बोझ भी!
📈 4. किसे फायदा, किसे नुकसान?
रुपये की गिरावट हर किसी के लिए बराबर नहीं होती—कुछ जीतते हैं, कुछ हारते हैं।
✔️ फायदा किसे?
निर्यातकों को—उन्हें हर डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलते हैं।
भारत घूमने आए विदेशियों को—उनके डॉलर की खरीद क्षमता बढ़ जाती है।❌ नुकसान किसे?
तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयातकों को—क्योंकि आयात महंगा होता जाता है
विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को—क्योंकि उनकी फीस और खर्च सीधे डॉलर से जुड़े होते हैं।
🏛️ 5. राजनीति की गूंज
Rupee की गिरावट सिर्फ आर्थिक बहस नहीं है; यह राजनीति का भी गर्म विषय बना हुआ है। विपक्ष ने पीएम मोदी के पुराने भाषणों को फिर से उठाया है, जिनमें वे पिछली सरकारों को रुपये की कमजोरी के लिए जिम्मेदार बताते थे। अब वही मुद्दा उनके सामने है।
🌏 6. एशिया में सबसे कमजोर, लेकिन बाकी कर रहे बेहतर
इस समय रुपया एशिया का सबसे कमजोर परफ़ॉर्मर है। इसके विपरीत, मलेशियाई रिंगिट, थाई बात और चीनी युआन जैसी मुद्राएँ डॉलर के मुकाबले कहीं ज्यादा स्थिरता दिखा रही हैं। यह भारत के लिए चिंतन का विषय है।
