भारत के एविएशन सेक्टर के लिए वेक-अप कॉल: IndiGo संकट के बाद सरकार ने तीन नई एयरलाइंस को क्यों दी मंजूरी
भारत का एविएशन सेक्टर हाल ही में एक गंभीर स्ट्रेस टेस्ट से गुज़रा, जब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने करीब 5,000 उड़ानें रद्द कर दीं। इसके चलते देशभर के हवाई अड्डों पर भारी अव्यवस्था फैल गई। यह संकट केवल ऑपरेशनल फेल्योर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय एविएशन में मोनोपॉली के खतरे पर एक बड़ी बहस छेड़ दी।
घरेलू बाजार में लगभग 65% हिस्सेदारी रखने वाली IndiGo पर अत्यधिक निर्भरता ने यह साफ कर दिया कि यदि एक ही एयरलाइन संकट में आती है, तो पूरा सिस्टम हिल सकता है।
IndiGo संकट और मोनोपोली का खतरा
IndiGo की उड़ान रद्दीकरण की समस्या सिर्फ एक कंपनी की विफलता नहीं थी। उसकी बाजार में मजबूत पकड़ के कारण, आंशिक संचालन रुकने से ही यात्रियों, एयरपोर्ट्स और कनेक्टिंग रूट्स पर व्यापक असर पड़ा।
इस घटना ने एक अहम सवाल खड़ा किया—
क्या भारत एक ही एयरलाइन पर इतना अधिक निर्भर रह सकता है?
नीति-निर्माताओं का जवाब स्पष्ट था—नहीं।
सरकार का रणनीतिक फैसला: तीन नई एयरलाइंस को मंजूरी
इस संकट के बाद केंद्रीय सरकार ने तीन नई क्षेत्रीय एयरलाइंस—Shankh Air, Al Hind और Fly Express—को मंजूरी दी। एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने इन स्वीकृतियों की घोषणा की।
सरकार का उद्देश्य साफ है:
- एविएशन सेक्टर में मोनोपॉली को कम करना
- क्षेत्रीय और छोटे शहरों की कनेक्टिविटी को मजबूत करना
हालांकि, यह केवल शुरुआती कदम है। इन एयरलाइंस को DGCA सर्टिफिकेशन, विमान खरीद, स्टाफ भर्ती और रूट अप्रूवल जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत 2026 के अंत तक संभव मानी जा रही है।
नई एयरलाइंस कौन-कौन सी हैं?
Shankh Air
उत्तर प्रदेश आधारित Shankh Air की योजना 20–25 विमानों का बेड़ा तैयार करने की है। इसमें करीब ₹2,100 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इसके संस्थापक श्रवण कुमार विश्वकर्मा हैं और फोकस उन रूट्स पर होगा जहां अभी कनेक्टिविटी कमजोर है।
Al Hind Air
केरल की Al Hind के पास मजबूत वित्तीय आधार और खाड़ी देशों के ट्रैवल सेक्टर में दशकों का अनुभव है। कंपनी का अनुमानित टर्नओवर $2.4 बिलियन है। शुरुआती तौर पर इसका फोकस हज और खाड़ी देशों से जुड़ी उड़ानों पर रहने की संभावना है।
Fly Express
हैदराबाद स्थित Fly Express की जड़ें लॉजिस्टिक्स सेक्टर में हैं। अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में यह एयरलाइन कार्गो से पैसेंजर एविएशन की ओर कदम बढ़ा रही है, जहां ऑपरेशनल एफिशिएंसी इसकी ताकत मानी जा रही है।
एविएशन बिजनेस की कड़वी सच्चाई
भले ही नई एयरलाइंस को मंजूरी उम्मीद जगाती हो, लेकिन एविएशन एक कम मुनाफे वाला कारोबार है। वैश्विक स्तर पर एयरलाइंस लगभग $1 ट्रिलियन का राजस्व कमाती हैं, लेकिन शुद्ध मुनाफा केवल $39.5 बिलियन—यानी करीब 3.9% मार्जिन।
भारत में हालात और चुनौतीपूर्ण हैं। यहां एयरलाइंस प्रति यात्री सिर्फ ₹700–₹800 ही कमा पाती हैं। ऊंचे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) टैक्स सबसे बड़ी बाधाओं में से एक हैं।
भारत बनाम वैश्विक एविएशन दिग्गज
भारत का एविएशन बाजार करीब $50 बिलियन का है, जो वैश्विक मानकों से काफी छोटा है। IndiGo भी दुनिया की एयरलाइंस में केवल 39वें स्थान पर है, जबकि Qatar Airways और Singapore Airlines जैसी कंपनियां प्रीमियम इंटरनेशनल और बिजनेस ट्रैवल से बड़ा मुनाफा कमाती हैं।
भारतीय एयरलाइंस मुख्य रूप से इकोनॉमी ट्रैवल पर निर्भर हैं, जिससे प्राइसिंग पावर सीमित रह जाती है।
आगे क्या होगा?
नई एयरलाइंस को मंजूरी सरकार की मंशा दिखाती है, लेकिन सफलता इस पर निर्भर करेगी:
- ईंधन करों में कटौती
- क्षेत्रीय सब्सिडी
- बेहतर फ्लीट उपयोग
- मजबूत रेगुलेटरी सपोर्ट
इनके बिना नई कंपनियों के लिए टिके रहना भी मुश्किल हो सकता है।
निष्कर्ष
IndiGo संकट ने भारत के एविएशन सेक्टर को एक स्पष्ट वेक-अप कॉल दिया है। नई एयरलाइंस को मंजूरी देना जरूरी कदम है, लेकिन यह अपने-आप में समाधान नहीं है।
संरचनात्मक सुधार, न कि केवल नए खिलाड़ी, तय करेंगे कि भारत एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और यात्रियों के अनुकूल एविएशन सिस्टम बना पाएगा या नहीं।